Sunday, July 4, 2010

यहीं झूठ हैं कि मैं झूठ नहीं बोलता !


कहते हैं मरने के बाद हमें अपने हर छोटे-बड़े सच-झूठ का ब्यौरा खुदा को देना होता हैं..हम सभी ने अपने जीवन में बहुत से झूठ बोले होंगे, अगर आप याद करें तो हो सकता हैं कि आपको अब याद भी न हो कि आपने कौन सा झूठ कब और किससे बोला था..अगर हम नज़र डाले तो हम सभी बचपन से ही झूठ बोलते आ रहे हैं..बचपन में कभी स्कूल न जाना हो तो पेट में अक्सर दर्द होता था, और अगले दिन टीचर से कह देना कि मां बीमार थी और तो और कभी-कभी तो हमनें अपने कई रिश्तेदारों को भी मार दिया...मां- बाप से झूठ बोलकर दोस्तों के साथ खूब फिल्में देखी और कई बार फीस का बहाना मार के पैसे भी लिए...ये तो हुए सिर्फ बचपन के झूठ हम आज भी अपनी रोज़मर्रा की ज़िदंगी में ना जाने कितने ही झूठ बोलते हैं..जैसे फोन पर किसी से बात न करनी हो तो, मैं अभी बिज़ी हूं, मीटिंग में हूं, इंडिया में ही नहीं हूं... दोस्तों के साथ कहीं जाना हो तो आज ऑफिस में ऑवरटाइम हैं, स्कूल या कॉलेज में एकस्ट्रा क्लास हैं, गाड़ी खराब हो गयी हैं, रास्ते में ट्रैफिक हैं वगैरह-वगैरह...

अगर आज कोई आपसे कहें कि मैं झूठ नहीं बोलता तो वो यकीनन झूठ ही बोल रहा है...सिर्फ आप ही नहीं सभी झूठ बोलते हैं, नेताओं का वोट मांगने का काम ही झूठे वादों से शुरू होता हैं, वकीलों को जीतने के लिए अक्सर झूठे गवाह खड़े करने पड़ते हैं, बिज़नेसमैन को टैक्स बचाने के लिए झूठी सेल्स रिपोर्ट बनानी पड़ती हैं, फिल्मी सितारें भी अक्सर झूठी कोंटरवर्सी का सहारा लेते हैं, जिससे वो और उनकी फिल्में लोगों की नज़र मे आ जाए, और आज-कल तो डॉक्टरों को भी पैसे एंठने के लिए झूठी रिपोर्टें दिखानी पढ़ती हैं

आखिर हम झूठ बोलते ही क्यों हैं ? जब हमें पता भी हैं कि झूठ के पैर नहां होते, और हमें झूठ को हमेशा याद भी रखना पढ़ता हैं कि हमने कौन सा झूठ किससे बोला था...जाने अनजाने में अगर हम भूल गए कि हमने क्या झूठ बोला था तो सच खुद-ब-खुद सामने आ जाएगा और हम उस सच को छुपाने के लिए एक और झूठ बोल देंगे क्योंकि आपने तो वो कहावत सुनी ही होगी कि एक झूठ को छिपाने के लिए सौ नए झूठ बोलने पढ़ते हैं....अरे ये मत भूलो यारों कि हमें कभी न कभी अग्नि परीक्षा भी देनी पढ़ सकती हैं....So Stay Away

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