Wednesday, July 21, 2010

नकस्ली से डरे या नकली से


कल शाम ऑफिस में हल्का सा सिर दर्द हुआ तो सोचा दवा क्या खाऊं 1 कप चाय पी लेती हूं, वैसे भी दवाईयां नकली ही तो आ रही हैं, तो पेपर उठाया ओर कैंटीन चाय पीने चली गई..पेपर में नक्सलियों के हमलों पर ख़बर थी कि "नक्सली हमले में 56 जवान शहीद"..तो वहीं कैंटीन में 2 दोस्त भारती और जय भी बैठे थे जो कोल्ड ड्रिंक पी रहे थे तो समोसे, नमकीन, बिस्कुट भी आ गए..समोसो के साथ मिली टमेटो कैचप पर चर्चा शुरू हुई और भारती ने कहा कि ये मत खा ये नकली हैं, मैंने भी हंसते हुए कह दिया कि तुम्हारी कोल्ड ड्रिंक नकली हैं...फिर जय ने कहा तुम्हारी चाय की चाय पत्ती नकली हैं..फिर क्या था बात बढ़ने लगी
भारती--सब्जियां नकली
जय--दालें नकली
मैं-- अरे सबसे जरूरी मसाले नकली
भारती--घी नकली
जय--पैसे (नोट) नकली
मैं--दवाईंयां नकली और तो और डॉक्टर ही नकली
भारती--कॉस्मेटिक्स प्रोडक्ट नकली
जय--दूध नकली
मैं--शराब नकली
भारती--खून नकली हैं
जय--MCD का स्टॉफ नकली
नेताओं के वादें नकली हैं, वकीलों के गवाह नकली हैं, बिजनेसमैन की सेल्स रिपोर्ट नकली हैं, रिश्तें नकली हैं इतने मे हमारे बॉस कैंटीन में आये और हमें डांटा कि ऊपर काम पड़ा हैं और तुम यहां गप्पे मार रहे हो..हम उठे और चल पड़े..और जाते जाते कहां सब नकली हैं पर बॉस की गाली और डांट असली हैं, इसमें कोई मिलावट नहीं...बिल्कुल प्योर....



1 comment:

  1. Bilkul Sach kaha...Sabhi se Darr k hee rehna padega...Acha Likha aapne

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